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तू सुखकर्ता तू दुखःहर्ता...

तू सुखकर्ता तू दुखःहर्ता...


गजानना श्री गणराया

गजानना श्री गणराया, आधी वंदू तुज मोरया !
मंगलमूर्ती श्री गणराया, आधी वंदू तुज मोरया ! ॥धृ.

सिंदुरचर्चित ढवळे अंग, चंदनऊटी खुलवी रंग
बघता मानस होते दंग, जीव जडला चरणी तुझिया ॥१॥

गौरीतनया भालचंद्रा, देवा कृपेच्या तू समुद्रा
वरदविनायक करुणागारा, अवघी विघ्ने नेसी विलया ॥२॥

गीत -- शांता शेळके

गणपतीची आरती (हिंदी)

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

लडूवों का भोग लगे संत करें सेवा
जय गणेश देवा

एक दंत दयावंत चार भुजधारी
माथे पर तिलक सोहे मुसे की सवारी

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
जय गणेश देवा

अंधे को आँख देत कोहीं को काया
बंज्हन को पुत्र देत निर्धन को माया

सूर्य शमा शरण आए सफल कीजये सेवा
जय गणेश देवा

जय गणेश

गणराज रंगी नाचतो.....

श्री गणपती आरती

नानापरिमळ दुर्वा शेंदूर शमिपत्रें।

लाडू मोद्क अन्ने परिपूरित पात्रें।

ऎसे पूजन केल्या बीजाक्षरमंत्रे।

अष्टहि सिद्धी नवनिधी देसी क्षणमात्रें॥१॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।

तुझे गुण वर्णाया मज कैची स्फ़ूर्ती ॥धृ.॥

तुझे ध्यान निरंतर जे कोणी करिती।

त्यांची सकलही पापे विघ्नेंही हरती।

वाजी वारण शिबिका सेवक सुत युवती।

सर्वहि पावती अंती भवसागर तरती॥ जय देव.॥२॥

शरणांगत सर्वस्वें भजती तव चरणी।

कीर्ती तयांची राहे जोवर शशितरणि।

त्रैलोक्यी ते विजयी अदभूत हे करणी।

गोसावीनंदन रत नामस्मरणी।

जय देव जय देव.॥३॥

श्री गणपती आरती



सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नांची
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची |
सर्वांगी
सुंदर उटी शेंदुराची,
कंठी
झळके माळ मुक्ताफळांची॥१॥

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती|
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥धृ॥

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा|
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा|
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा |
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया|
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ॥२॥

लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना |
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना|
दास रामाचा वाट पाहे सदना|
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना|
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती|
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥३॥



श्रीगणेशस्तोत्र

        श्रीगणेशस्तोत्र 

श्रीगणेशाय नमः नारद उवाच

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् |
भक्तावासं स्मरेनित्यं आयुःकामार्थसिद्धये || ||

प्रथमं वक्रतुण्डं एकदन्तं द्वितीयकम् |
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् || ||

लम्बोदरं पञ्चमं षष्ठं विकटमेव |
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् || ||

नवमं भालचन्द्रं दशमं तु विनायकम् |
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् || ||

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः |
विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरः प्रभुः || ||

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् |
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् || ||

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् |
संवत्सरेण सिद्धिं लभते नात्र संशयः || ||

अष्टेभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् |
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः || ||

इति श्रीनारदपुराणे संकटनाशनं गणेशस्तोत्रं संपूर्णम् |

किशोर परब यांच्या घरी विराजमान झालेली गणेश मुर्ती.

किशोर परब यांच्या घरी विराजमान झालेली गणेश मुर्ती.